Sound of soul

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*घनघोर अंधेरा छाये जब,*

*कोई राह नज़र ना आये जब,*

*कोई तुमको फिर बहकाये जब,*

*इस बात पे थोड़ी देर तलक,*

*तुम आँखें अपनी बंद करना,*

*और अंतरमन की सुन लेना,*

*मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें,*

*पर अंतरमन सच बोलेगा..!!*
*जब लम्हा-लम्हा ‘आरी’ हो,*

*और ग़म खुशियों पे भारी हो,*

*दिल मुश्किल में जब पड़ जाये,*

*कोई तीर सोच की ‘अड़’ जाये,*

*तुम आँखें अपनी बंद करना*

*और अंतरमन की सुन लेना,*

*मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें,*

*पर अंतरमन सच बोलेगा..!!*
*जब सच-झूठ में फर्क ना हो,*

*जब गलत-सही में घिर जाओ,*

*तुम नज़र में अपनी गिर जाओ,* 

*इस बात पे थोड़ी देर तलक,*

*तुम आँखें अपनी बंद करना,*

*और अंतरमन की सुन लेना,*

*मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें,*

*पर अंतरमन सच बोलेगा..!!*
*ये जीवन एक छाया है,*

*दुख, दर्द, मुसीबत माया है,*

*दुनिया की भीड़ में खोने लगो,*

*तुम खुद से दूर होने लगो,*

*तुम आँखें अपनी बंद करना,* 

*और अंतरमन की सुन लेना,*

*मुमकिन है हम तुम झूठ कहें,*

*पर अंतरमन सच बोलेगा..!!*

रचना- राजीव गोयल जी

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