Population is no.1 problem of india

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जुलाई माह में विश्व जनसंख्या दिवस मनाया गया।न जाने कितने लोगों को खबर तक नही हुई।जबकि जनसंख्या भारत की सबसे बड़ी समस्या है।इस विराट समस्या के लिए हम भारतीयों में व् मीडिया में बिल्कुल भी उत्साह नहीं दिखाई दिया। हमारी यह उदासीनता चिंतित कर देने वाली वाली है। क्षेत्रफल के आधार पर हम सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाला राष्ट्र है और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि एक व्यक्ति की एक निश्चित आकाश, अवकाश, स्थान की आवश्यकता होती है। उदाहरणतः जब हम अपने कमरे में अकेले होते हैं दर्पण के सामने अलग-अलग तरह से मुंह बनाते हैं अलग अलग तरह की हरकतें करते हैं। जिससे हम मानसिक रूप से स्वयं को काफी हल्का भी महसूस करते हैं यह हमारे तनाव को काफी कम करता है। जबकि यदि किसी की उपस्थिति वहां हो भले ही वह व्यक्ति आपको कुछ भी ना कहे। फिर भी आप अपने मन की इन इच्छाओं को नहीं निकाल सकते हैं। इच्छाओं का यह दमन हमें पागल तक कर सकता है। इसीलिए हम कहीं भी चले जाएं कितना भी घूम लें। लेकिन अपने घर के अभाव को हम सभी महसूस करते हैं। और तो और हम यदि घर में 2 दिन के लिए अधिक मेहमान आ जाए अपने व्यक्तिगत कमरे की आवश्यकता को जल्द ही महसूस करने लगते हैं क्योंकि हम अपने घर पर अपने व्यक्तिगत कमरे में कुछ भी आजादी के साथ कर सकते हैं।आपकी मानसिक शांति के लिए आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए आपकी समृद्धि के लिए एक सही जनसंख्या घनत्व या पर्याप्त स्थान अति आवश्यक है। और आने वाला समय ऐसा लगता है शायद इस भारत की धरती पर कोई जगह होगी जहां आप अकेले हो पाए। जो कि संपूर्ण मानव जाति के विकास के लिए हानिकारक होगा। आपने कभी गौर किया है जो भी क्षेत्र भीड़भाड़ से भरा होता है उस क्षेत्र की ऊर्जा में एक भारी कमी है रहती है आपने कभी ख्याल किया है जब कभी आप भीड़ भाड़ भरे क्षेत्र से, बिना कोई मेहनत का कार्य किए भी वापस घर एकांत में आते हैं आप खुद को बहुत थका हुआ महसूस करते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि भीड़ आपकी ऊर्जा को खींच लेती है मनोवैज्ञानिकों का तो यहां तक दावा है यदि एक निश्चित क्षेत्रफल प्रत्येक व्यक्ति या प्राणी को नहीं मिला या नहीं मिलता है तो मनुष्य व प्राणी पागलों जैसा व्यवहार करने लगते हैं इसके बंदरों पर सफल प्रयोग भी किए जा चुके हैं। कुछ बंदरों को मानक से बहुत कम क्षेत्रफल में कुछ सालों के लिए बचपन से ही रखा गया परिणाम स्वरुप उनका बौद्धिक मैं मानसिक विकास नहीं हो सका। जनसंख्या वृद्धि को बढ़ावा देने वाले वर्गों का अल्प मानसिक विकास व अधिकतर रोगी होना इसका प्रबल उदाहरण है इसलिए मैं कहता हूं अभी भी वक्त है जागने का जागो और जगाओ। धन्यवाद

More than 2 child must be declared as offensive issue and people those are not serious about this, Govt.must cut their govt. facilities because where there will be more rush all kind of work will be slow down.To facilitate the rush is always problematic in all manner.So, to control this make aware the peoples. please share this post to all your contacts.

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?डॉ संजीव कुमार?

(राष्ट्रीय अध्यक्ष ?? योगीज़⛳सेना)

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