प्रत्येक वस्तु की उत्पत्ति का क्रम

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टोनोस्कोप का आविष्कार करने वाले डॉक्टर हैंस जैनी 1967 मे टोनोस्कोप नाम के यंत्र पर ॐ का उच्चारण किया तो श्री यंत्र की आकृति उभरकर आने लगी। टोनोस्कोप का प्रयोग ध्वनि तरंगों की तस्वीर देखने के लिए किया जाता है। यह एक रहस्य का विषय है की प्राचीन काल में जब टोनोस्कोप जैसा कोई यंत्र नहीं था लोग ॐ की ध्वनि तरंगों की तस्वीर “श्री यंत्र” को अच्छी तरह से प्रस्तुत करने की क्षमता से युक्त थे। इस बात पर हैंस जैनी आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहते हैं कि पूर्वार्त्त देशों के मनीषि ऋषियों की खोजें अत्यधिक प्रमाणित थी। इससे प्रमाणित होता है कि ॐ वास्तव में संपूर्ण जगत का आधार है क्योंकि “श्रीयंत्र” योग में वर्णित सभी आठ चक्रों की सम्मिलित आकृति है और यह आठ चक्र संपूर्ण जगत के निर्माण के तत्वों “महाभूतों” के संकेत रूप हैं।(इस विषय में बाद में चर्चा करेंगे अन्यथा वर्तमान विषय की दिशा बदल जाएगी) श्री यंत्र की संपूर्ण आकृति पर दृष्टिपात करें तो सबसे मध्य में सबसे कम जटिल व कम पंखुड़ियों वाला चक्र (वृत्त) फिर उससे जटिल व बड़ा, उसके बाद उससे भी जटिल व बड़ा चक्र (वृत्त) होता है।व चक्र (वृत्त) क्रमशः बडा होता जाता है।

https://youtu.be/0Yz3OYijUtI

साथ ही यदि हम ब्रम्हांड व्यवस्था पर भी दृष्टिपात करें तो सभी ग्रह नक्षत्र आदि चक्राकार (वृत्ताकार) गति कर रहे हैं सबसे छोटा कण इलेक्ट्रॉन भी अनवरत वृत्ताकार गति करता है। जिसकी इसी गति पर पूरा इलेक्ट्रॉनिक्स विज्ञान,अधिकतर आधुनिक तकनीक, व उसके निर्माण आधारित हैं।श्वांस-प्रच्छवांश, शरीर में रक्त का परिभ्रमण ॐ की ही वृत्ताकार ध्वनि तरंगों के कारण लगातार चलता रहता है।कर्मफल चक्र जीवन-मरण-पुनर्जन्म-पुन:मरण,सृष्टि-प्रलय, जल से बर्फ- बर्फ से जल,जल से वाष्प-वाष्प से जल आदि घटनाएं एक चक्र में ही घटित हो रही है।संसार का कोई भी पदार्थ नष्ट नहीं होता बल्कि मात्र रुपांतरित हो रहा है।

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