अहम् विसर्जन क्रिया (एक उत्कृष्ट योग विधि)

0
64

विधि-

चरण-

1.) 10 श्वांस बायें नाक के स्वर से अंदर भरें व बाहर निकालें तत्पश्चात 10 श्वांस दाहिने नाक के स्वर से अंदर भरे हुए बाहर निकाल दें।इसी प्रकार 10 से 15 श्वांस अनुलोम विलोम प्राणायाम करें तत्पश्चात दोनों हाथ अपने घुटनों पर (ध्यान मुद्रा में) या गोद में रखते हुए मानसिक संकल्प से अनुलोम विलोम प्राणायाम करें। मानसिक संकल्प से अनुलोम विलोम में अपने मन के द्वारा ऐसा संकल्प करना होता है कि श्वांस बायें नाक के स्वर से अंदर जा रही है। फिर नाक के स्वर दाहिने स्वर से अंदर आ रही है।इस प्रकार कुछ दिनों के अभ्यास में सांस वास्तविक रूप में इसी प्रकार मनचाहे आदेश से चलने लगती है।

बाय सर से सांस अंदर भरें ओम का जाप करते हुए मानसिक संकल्प से स्वान सुहाग स्वास को सहस्रधारा शान चक्रवर्ती छोड़ते हुए चक्र को प्रकाशित होते हुए होने की धारणा कल्पना करे

दाएं स्वर से समान प्रक्रिया को दोहराएं

चरण 4 व 5 को दो-दो बार करें साधना में रुचि वह उन्नति होने पर एक एक एक कर संख्या बढ़ाई जा सकती है

इसी प्रकार दो दो बार प्रत्येक चक्र पर स्वास्थ छोड़ते हुए चित्रकूट चक्र को प्रकाशित होता हुआ देखते हुए प्रत्येक चक्र के बीज मंत्र क्रमशः ओम हम हम रम वम ताजा करना है

साथ ही धारणा करनी है कि मेरा अहम अहम अहंकार मैं के उच्चारण के साथ बाहर जा रहा है।

मूलाधार पर रीड के आखिरी सिरे पर तीन तीन बार नम का जाप करना है

शेर फिर फिर एक एक बार यही प्रक्रिया उलटे क्रम में दो रानी है

अंत में 5 बार मध्यम की व्रत तीव्र ध्वनि के साथ ओम का जाप करना है साथ ही सांस को दोनों नासा सर से भरने वह छोड़ में का संकल्प करना है अंत में शांत बैठ जाना है वह शांति सन्नाटे की दुनिया पर एकाग्र चंद्र से चित्र से चित्र चित्र से अधिकतम समय तक सुनते ही रहना है

CYBER SAINIK PLZ SHARE FOR 🇮🇳🕉️⛳️
SHARE

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here