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प्रश्न- योगीज सेना के कार्यकर्ता/ पदाधिकारी/ साइबर सैनिक बनने के लिए क्या पात्रता चाहिए?

उत्तर- इसके लिए आपको केवल इतनी ही पात्रता चाहिये कि आपने मानव के रूप में जन्म लिया हो।और 🕉️ बोल सकते हों व निरंतर 1 प्रतिशत सुधार स्वयं में व समाज में करने की प्रक्रिया में शामिल होने की आपमे इच्छा शक्ति हो। जोकि यदि कोई मनुष्य होगा तो उसमें अवश्य होगी।

पृश्न- योगीज सेना क्या है?

उत्तर- भगवान श्री कृष्ण गीता में कहते हैं

“समत्वं हि योग उच्यते”

अर्थात सभी प्राणियों के लिए समान दृष्टि हो जाना ही योग है। इस प्रकार विषमता या असंतुलन !समस्या है,रोग है, भोग है।और संतुलन! समाधान है,योग है!अतः #जनसंख्या #आरक्षण #आर्थिक #संवैधानिक #धार्मिक #सांस्कृतिक #शारीरिक #मानसिक #आध्यात्मिक# सामाजिक #शैक्षिक .… आदि विषमताओं को दूर कर, समता स्थापित करने के लिए प्रयासरत व तत्पर रहने वाले समदृष्टि सम्पन्न व्यक्ति योगी ही हैं। और इन योगिचित्त के लोगों की राष्ट्रनिर्माण हेतु संगठित ऊर्जा योगीज सेना है।

योगी का अर्थ सिर्फ यह नहीं होता, कि कोई व्यक्ति घने जंगलों में तप की मुद्रा में ही बैठा हो या साधु की वेशभूषा में हो। योगी का अर्थ किसी भी व्यक्ति को समदृष्टि सध जाने से होता है। (सबका साथ सबका विकास) और यह समदृष्टि अलग-अलग व्यक्तियों को भिन्न भिन्न साधनों यज्ञ, दान, तप, सेवाकर्म, ध्यान, सतगुरु कृपा, हठयोग, प्रारब्ध आदि किसी से भी प्राप्त हो सकती हैं।

पृश्न-हमे समदृष्टि वाला (योगी) क्यों बनना चाहिये?

उत्तर- भगवान श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं,

तापस्विsधिको योगी , ज्ञानिभ्योsपि मतोधिकः।

कर्मेभ्योश्च अधिको योगी ,तस्माधयोगी भवार्जुन।।

अर्थात, तपस्वी से अधिक(श्रेष्ठ) योगी होता है।ज्ञानी से अधिक योगी होता है। कर्म करने वाले लोगों से भी अधिक (श्रेष्ठ) योगी होता है।इसलिए हे! अर्जुन तू योगी बन (क्योंकि योगी में तीनों ही गुण तप, ज्ञान व कर्मशीलता सम्मिलित रूप से होते है।)

नोट- भगवान श्रीकृष्ण की नजर में मानव जीवन का श्रेष्ठतम लक्ष्य योगी बनना है क्योंकि योगी मनुष्यों में सबसे श्रेष्ठ व गुणी व्यक्तित्व है।जोकि उपर्युक्त योग की परिभाषा से सिद्ध होता है।

ऐसे सेवा, ज्ञान, तप व कर्मशीलता स्वभाव वाले मनुष्यों की अन्त्योदय व राष्ट्रोदय की एकजुट व ईमानदार कोशिश का नाम योगीज सेना है।

इस प्रकार योगीज सेना प्राचीन योगियों,वर्तमान योगियों,तैयार हो रहे योगियों, भविष्य के योगियों की सेना है।योगीज सेना इस संगठित योगऊर्जा द्वारा राष्ट्र के आखिरी व्यक्ति तक संविधान, सरकारी योजनाओं व योगियों की विशिष्ट अद्भुत स्वास्थ्य व आध्यात्मिक सरल योग साधनाओं की पहुँच सुनिश्चित करना चाहती है। जिससे हर वंचित शोषित व्यक्ति का जीवन सुखमय हो सके।

पृश्न- योगीज सेना की राजनीति के बारे में क्या अवधारणा है

उत्तर

अपने ज्ञान, तप, त्याग, कर्मशीलता, संस्कृति प्रेम, अपरिग्रह आदि गुणों के कारण राष्ट्र सेवा के लिए मानव जाति में सबसे अधिक श्रेष्ठ, सेवाभावी व उपयोगी योगी ही रहे हैं।इसलिए योगियों द्वारा यदि राष्ट्र की सेवा संगठित होकर की जाने लगे । तो, इसका परिणाम अद्भुत होगा। इसी भावना से संगठन का नाम योगीज सेना अर्थात योगियों का संगठित बल रखा गया। औऱ निःसंदेह राजनीति सेवा का सबसे सक्षम प्रभावशाली व त्वरित माध्यम है।अतः उन्नत चित्त के अधिक से अधिक लोगों को समाज मे अपनी उच्च छवि स्थापित करने का अवसर देने हेतु, योगीज⛳️सेना के पदाधिकारी/कार्यकर्ता/सायबर सैनिक/ योग प्रचारक के रूप में एक सेवामंच प्रदान किया जा रहा है। जिससे सेवा कार्यो द्वारा अपने-अपने क्षेत्र में उनका यश कीर्ति फैले। फलस्वरूप अधिक से अधिक योगीयों का हमारी संसद, विधानसभा, नगरपालिका, पंचायतों में प्रवेश हो व एक स्वच्छ राजनीति का विकास हो सके। क्योंकि भ्रष्टाचार व बहुत सी गंभीर समस्याओं से मुक्ति , संचय प्रवृत्ति से मुक्त, स्वच्छ चित्त व चरित्र के व्यक्तियो के राजनैतिक प्रवेश के बिना संभव नहीं है।

पृश्न- योग को सरल शब्दों में समझायें?

उत्तर- सामान्यतः हम सब यह कुछ शब्द अपनी बोलचाल में प्रयोग करते हैं जैसे राक्षस आत्मा,बुरी आत्मा, प्रेत आत्मा, भूत आत्मा, आत्मा,अच्छी आत्मा, महात्मा ( महान आत्मा), हुतात्मा( बलिदानी आत्मा), देव आत्मा, परमात्मा(परम आत्मा)। इस प्रकार अगर हम आत्मा की इन अवस्थाओं को ध्यान से समझें तो ज्ञात होगा, जैसे-जैसे एक (मनुष्य) आत्मा की जागृति का स्तर व सदगुणों का स्तर घटता जाता है अहंकार का स्तर बढ़ता चला जाता है।वैसे-वैसे मनुष्य(आत्मा) के श्रेणी (स्तर) का पतन होता जाता है व इसके विपरीत जैसे-जैसे उसके सदगुणों में वृद्धि व अहंकार शून्यता का भाव बढ़ता चला जाता है। वैसे-वैसे आत्मा का श्रेणी (स्तर) बढ़ता चला जाता है। वह महात्मा→हुतात्मा→देवात्मा के स्तरों के रूप में प्रोन्नत होते हुए, अंततः अपने सर्वोच्च (परम) स्तर परमात्मा (परम पद) को प्राप्त कर लेता है।इस प्रकार आत्मा ही परम आत्मा (परमात्मा) हो जाता है। और यही आत्मा और परमात्मा का मिलन(योग) है यही योग की परिभाषा भी है।यही आत्मा के विस्तार की व सफलतम मानव जीवन की चरम परिणीति है।

पृश्न- एक सामान्य व्यक्ति के लिए क्या यह सब संभव है?

उत्तर- कोई भी व्यक्ति सामान्य नहीं होता ।प्रत्येक व्यक्ति में बहुत सी असाधारण शक्तियां विद्यमान है परंतु उसे उन शक्तियों का ज्ञान नहीं होता। योगीज सेना की अतिविशिष्ट व सरल साधनायें जो कि प्रत्येक सामान्य व्यक्ति कर सकता है ( ॐ साधना, ॐ कुण्डलिनी साधना, अहम विसर्जन साधना, सर्वांग साधना, स्व-बोध साधना, धन वृद्धि साधना, परम प्रेम साधना) शक्ति जागरण व आत्मोन्नति की इस गति को बहुत ही सुगमता से बढ़ा देती है । इस प्रकार कोई भी अपने सद्गुणों में निरंतर वृद्धि करने से परमात्मा के या परमात्मा स्तर के आंशिक रूप से निकट होते जाते हैं। इस प्रकार सद्गुण विकास व अहंकार शून्यता की यह प्रक्रिया आसान योगमार्ग हैं।

प्रश्न- तो क्या योगीज सेना को सिर्फ योगाचार्य, योगी ,संत ही ज्वाइन कर सकते हैं?

उत्तर- यदि आपने मानव के रूप में जन्म लिया हो।और निरंतर स्वयं में 1% सद्गुण वृद्धि व अहंकार शून्यता की प्रक्रिया में शामिल होने लायक आपमे इच्छा शक्ति हो। तो आयोगीज सेना के सदस्य/साइबर सैनिक/ पदाधिकारी बन सकते हैं। एवम ऐसे व्यक्ति, जो योग शब्द को पसंद करते हैं उनके भीतर योगी होने की एक प्रबल संभावना है क्योंकि पूर्व जन्म के संस्कारों से ही वह योग पसंद करते हैं, साथ ही योग(परमात्मा-प्राप्ति) व राष्ट्र सेवा प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है अतः प्रत्येक व्यक्ति को अपने इन मूलभूत कर्तव्यों का पालन करने हेतु योगीज सेना को ज्वाइन करना चाहिए।व स्वयं के लिए व राष्ट्र के लिए उन्नति का मार्ग प्रशस्त करने के इस कर्म यज्ञ में योगदान करने के अपने कर्तव्य को समझने की आवश्यकता है।

पृश्न- योगीज⛳️सेना के पदाधिकारी/कार्यकर्ता/सायबर सैनिक/ योग प्रचारक के क्या कार्य हैं ?

उत्तर- सरकारी योजनाओं, संविधान, व योगीज सेना की आत्मोन्नति , स्वास्थ्य उन्नति व धन उन्नति की अतिविशिष्ट व सरल साधनाओं

(ॐ साधना , ॐ कुंडलिनी साधना, अहम विसर्जन साधना, स्व-बोध साधना, परम प्रेम साधना, सर्वांग साधना, धन वृद्धि साधना) की जानकारी का सोशल मीडिया, कार्यक्रमों व अन्य माध्यमों द्वारा आखिरी शोषित वंचित तक अपने अपने कार्यक्षेत्र व उत्तरदायित्व अनुसार प्रचार-प्रसार करना व कार्यकारिणीयों व सदस्यों का निरंतर विस्तार करना।

नोट- इस हेतु 10 मिनट प्रतिदिन सोशल मीडिया पर प्रचार करना सभी के लिए अनिवार्य है।

पृश्न- सर्वांगीण अंत्योदय क्या है?

उत्तर- मनुष्य जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता स्वास्थ्य, धन व अध्यात्म के सही व सहज संसाधन समाज के सबसे वंचित व्यक्ति को पूर्ण सहजता से उपलब्ध हो ।यही सर्वांगीण अन्त्योदय है

1.आध्यात्मिक अंत्योदय- अंतिम व्यक्ति तक निश्चित परिणामदायी अध्यात्म (Result Oriented spirituality) को पहुँचाना।अर्थात अहम विसर्जन साधना, स्व- बोध साधना,परम प्रेम साधना, श्री धनवृद्धि साधना की पहुंच सुनिश्चित करना
2.आर्थिक अंत्योदय- अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं के आर्थिक लाभ व श्री धनवृद्धि साधना की पहुंच सुनिश्चित करना
3.स्वास्थ्य अंत्योदय- अन्तिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य संबंधी सरकारी योजनाओं के लाभ व सर्वांग-योग-साधना की पहुंच सुनिश्चित करना
4.संवैधानिक अंत्योदय ( संवैधानिक जानकारी की समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंच सुनिश्चित करना।जिससे सबको यह पता लग सके कि क्या हमारे अधिकार है, हमें किन नियम कानून के आधार पर जीवन जीना है। जिससे सामाजिक समता व आमजन के आत्मविश्वास मे वृद्धि हो सके)
5.स्थानीय कार्यकारिणीयों द्वारा समसामयिक व स्थानीय मुद्दों का सात्विक निस्तारण।

योगीज⛳️सेना में आपका हार्दिक स्वागत है व आपसे आग्रह है, कि अपना कर्तव्य समझ! योगियों, महापुरुषों,सैनानियों,शहीदों के सपनों का भारत निर्मित करने के सेवाकार्य हेतु योगीज⛳️सेना के पदाधिकारी/साइबर-सैनिक(कार्यकर्ता) बनें व कम से कम अपने 10 मिनट स्मार्टफोन पर सरकारी योजनाओं, संविधान,सही अध्यात्म, स्वास्थ्य की पोस्ट जरूर शेयर करें।हम सभी को एकजुट होकर सत्य, योग, अध्यात्म, समाज निर्माण, राष्ट्र निर्माण, शहीदों ,महापुरुषों , संस्कृति व पर्यावरण से प्रेम का स्वभाव रखने वाले सात्विक व योगी-चित्त के लोगों की बिखरी हुई ऊर्जा को संगठित करना है, व राष्ट्रहित में सर्वांगीण अंत्योदय के लिए सदुपयोग करना है। इस महायज्ञ में भारत माता के सच्चे सपूतों को अपना योगदान करना ही होगा।
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