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पृश्न- योगीज सेना क्या है? व इसके अनुसार योगी की क्या अवधारणा है?

उत्तर- मृत्यु संसार का सबसे बड़ा असत्य है? और अमरता सबसे बड़ा सत्य ? यह अनुभव कर लेना योग है और अनुभव करने वाला योगी है,और जानने की जिज्ञासा चेष्टा रखने वाला भविष्य का योगी है और इनकी राष्ट्रनिर्माण हेतु संगठित ऊर्जा योगीज सेना है।

सामान्यतः हम सब यह कुछ शब्द अपनी बोलचाल में प्रयोग करते हैं जैसे राक्षस आत्मा,बुरी आत्मा, प्रेत आत्मा, भूत आत्मा, आत्मा,अच्छी आत्मा, महात्मा ( महान आत्मा), हुतात्मा( बलिदानी आत्मा), देव आत्मा, परमात्मा(परम आत्मा)। इस प्रकार अगर हम आत्मा की इन अवस्थाओं को ध्यान से समझें तो ज्ञात होगा, जैसे-जैसे एक (मनुष्य) आत्मा की जागृति का स्तर व सदगुणों का स्तर घटता जाता है अहंकार का स्तर बढ़ता चला जाता है।वैसे-वैसे मनुष्य(आत्मा) के श्रेणी (स्तर) का पतन होता जाता है व इसके विपरीत जैसे-जैसे उसके सदगुणों में वृद्धि व अहंकार शून्यता का भाव बढ़ता चला जाता है। वैसे-वैसे आत्मा का श्रेणी (स्तर) बढ़ता चला जाता है। वह महात्मा→हुतात्मा→देवात्मा के स्तरों के रूप में प्रोन्नत होते हुए, अंततः अपने सर्वोच्च (परम) स्तर परमात्मा (परम पद) को प्राप्त कर लेता है।इस प्रकार आत्मा ही परम आत्मा (परमात्मा) हो जाता है। और यही आत्मा और परमात्मा का मिलन(योग) है यही योग की परिभाषा भी है।यही आत्मा के विस्तार की व सफलतम मानव जीवन की चरम परिणीति है। योगीज सेना की अतिविशिष्ट व सरल साधनायें (अहम विसर्जन साधना, सर्वांग साधना, स्व-बोध साधना, धन वृद्धि साधना, परम प्रेम साधना) आत्मोन्नति की इस गति को बहुत ही सुगमता से बढ़ा देती है । इस प्रकार हम जैसे जैसे अपने सद्गुणों में वृद्धि करते हैं वैसे वैसे परमात्मा के या परमात्मा स्तर के आंशिक रूप से निकट होते जाते हैं। इस प्रकार जो भी इस सद्गुण विकास व अहंकार शून्यता की प्रक्रिया में स्वयं को शामिल कर इस आसान योगमार्ग पर चल रहे हैं वह सभी योगी कहलाने के अधिकारी हैं, और ऐसे उन्नत चित्त योगियों की राष्ट्रहित व समाजहित में प्रयोग की जा रही सामूहिक/संगठित ऊर्जा का नाम योगीज⛳️सेना है।

आओ योगीज सेना का हिस्सा बनकर स्वयं में प्रतिदिन/प्रतिसप्ताह/प्रतिमाह 1% अपने व्यक्तित्व में सद्गुणों का विकास व 1% अहंकार में कमी करने का संकल्प करें व स्वयम के सद्गुण विकास व अहंकार शून्यता के द्वारा परमपद परमात्मा (मोक्ष) प्राप्ति की इस अनवरत यात्रा के लिए (सेवापूर्ण व सामान्य जीवन जीते हुए) स्वयं को ज्ञानपूर्वक, रुचिपूर्वक अनुमति दें।

प्रश्न-जुड़ने के लिए हमें क्या पात्रता चाहिए?

उत्तर- इसके लिए आपको केवल इतनी ही पात्रता चाहिये कि आपने मानव के रूप में जन्म लिया हो।और 🕉️ बोल सकते हों व निरंतर एक प्रतिशत के स्वयं में व समाज में सुधार की प्रक्रिया में शामिल होने लायक आपमे इच्छा शक्ति हो। जोकि आपके पास है।

पृश्न-हमे योगी क्यों बनना चाहिये?

उत्तर- भगवान श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं,

तापस्विsधिको योगी , ज्ञानिभ्योsपि मतोधिकः।

कर्मेभ्योश्च अधिको योगी ,तस्माधयोगी भवार्जुन।।

अर्थात, तपस्वी से अधिक(श्रेष्ठ) योगी होता है।ज्ञानी से अधिक योगी होता है। कर्म करने वाले लोगों से भी अधिक (श्रेष्ठ) योगी होता है।इसलिए हे! अर्जुन तू योगी बन (क्योंकि योगी में तीनों ही गुण तप, ज्ञान व कर्मशीलता सम्मिलित रूप से होते है।)

पृश्न-इससे हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर- इस श्लोक से शिक्षा मिलती है कि भगवान श्रीकृष्ण की नजर में मानव जीवन का श्रेष्ठतम लक्ष्य योगी बनना है क्योंकि योगी मनुष्यों में सबसे श्रेष्ठ अर्थात सद्गुणी व्यक्तित्व है।जोकि उपर्युक्त योग की परिभाषा से भी सिद्ध होता है।

इस प्रकार योगीज सेना मनुष्यों में सबसे श्रेष्ठ व्यक्तियों(योगियों) का समूह है।सेवा, ज्ञान, तप व कर्मशीलता जिनका स्वभाव होता है।अतः ऐसे ही मनुष्यों से अन्त्योदय, राष्ट्रोदय, की ईमानदार कोशिश की अपेक्षा की जा सकती है। इसीलिए संगठन का नाम योगीज सेना है।

इस प्रकार योगीज सेना प्राचीन योगियों,वर्तमान योगियों,तैयार हो रहे योगियों, भविष्य के योगियों की सेना है।योगीज सेना इस संगठित योगऊर्जा द्वारा राष्ट्र के आखिरी व्यक्ति तक संविधान, सरकारी योजनाओं व हमारी विशिष्ट अद्भुत स्वास्थ्य व आध्यात्मिक योग साधनाओं की पहुँच सुनिश्चित करना चाहती है। जिससे हर वंचित शोषित व्यक्ति का जीवन सुखमय हो सके।

प्रश्न- तो क्या योगीज सेना को सिर्फ योगाचार्य, योगी ,संत ही ज्वाइन कर सकते हैं?

उत्तर- नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है जिस भी व्यक्ति को आभास है कि वह एक आत्मा है या उसके भीतर आत्मा है वह जॉइन कर सकते हैं। अतः योगी हो सकने की व योगीज सेना का हिस्सा होने की न्यूनतम योग्यता के रूप में आपको केवल इतनी ही पात्रता चाहिये कि आपने मानव के रूप में जन्म लिया हो।और निरंतर स्वयं में 1% सद्गुण वृद्धि व अहंकार शून्यता की प्रक्रिया में शामिल होने लायक आपमे इच्छा शक्ति हो। तो आप योगीज सेना के सदस्य/साइबर सैनिक/ पदाधिकारी बन सकते हैं। एवम ऐसे व्यक्ति, जो योग शब्द को पसंद करते हैं उनके भीतर योगी होने की एक प्रबल संभावना है क्योंकि पूर्व जन्म के संस्कारों से ही वह योग पसंद करते हैं और योग(परमात्मा-प्राप्ति) व राष्ट्र सेवा प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है अतः प्रत्येक व्यक्ति को अपने इन मूलभूत कर्तव्यों का पालन करने हेतु योगीज सेना को ज्वाइन करना चाहिए।व स्वयं के लिए व राष्ट्र के लिए उन्नति का मार्ग प्रशस्त करने के इस कर्म यज्ञ में योगदान करने के अपने कर्तव्य को समझने की आवश्यकता है।

पृश्न- योगीज सेना की राजनीति के बारे में क्या अवधारणा है

उत्तर

अपने ज्ञान, तप, कर्मशीलता आदि गुणों के कारण राष्ट्र सेवा के लिए मानव जाति में सबसे अधिक श्रेष्ठ, सेवाभावी व उपयोगी योगी ही रहे हैं।इसलिए योगियों द्वारा यदि राष्ट्र की सेवा संगठित होकर की जाने लगे । तो, इसका परिणाम अद्भुत होगा। इसी भावना से इसका नाम योगीज सेना अर्थात योगियों का संगठित बल रखा गया। औऱ निःसंदेह राजनीति सेवा का सबसे सक्षम माध्यम है।अतः उन्नत चित्त के अधिक से अधिक लोगों को समाज मे अपनी उच्च छवि स्थापित करने का अवसर प्रदान करने हेतु, योगीज⛳️सेना के पदाधिकारी/कार्यकर्ता/सायबर सैनिक/ योग प्रचारक के रूप में एक सेवामंच प्रदान किया जा सके। जिससे अपने-अपने क्षेत्र में उनका यश कीर्ति फैले। फलस्वरूप अधिक से अधिक योगीयों का हमारी संसद, विधानसभा, नगरपालिका, पंचायतों में प्रवेश हो व एक स्वच्छ राजनीति का विकास हो सके। क्योंकि भ्रष्टाचार व बहुत सी गंभीर समस्याओं से मुक्ति स्वच्छ चित्त व चरित्र के व्यक्तियो के राजनैतिक प्रवेश के बिना संभव नहीं है।

पृश्न- योगीज⛳️सेना के पदाधिकारी/कार्यकर्ता/सायबर सैनिक/ योग प्रचारक के क्या कार्य हैं ?

उत्तर- सरकारी योजनाओं, संविधान, व योगीज सेना की आत्मोन्नति , स्वास्थ्य उन्नति व धन उन्नति की अतिविशिष्ट व सरल साधनाओं (अहम विसर्जन साधना, स्व-बोध साधना, परम प्रेम साधना, सर्वांग साधना, धन वृद्धि साधना) की जानकारी का सोशल मीडिया, कार्यक्रमों व अन्य माध्यमों द्वारा आखिरी शोषित वंचित तक अपने अपने कार्यक्षेत्र व उत्तरदायित्व अनुसार प्रचार-प्रसार करना व कार्यकारिणीयों व सदस्यों का निरंतर विस्तार करना।

नोट- इस हेतु 10 मिनट प्रतिदिन सोशल मीडिया पर प्रचार करना सभी के लिए अनिवार्य है।

क्योंकि, आप सभी को सत्य, योग, अध्यात्म, समाज निर्माण, राष्ट्र निर्माण, शहीदों ,महापुरुषों , संस्कृति व पर्यावरण से प्रेम का स्वभाव रखने वाले सात्विक व योगी-चित्त के लोगों की बिखरी हुई ऊर्जा को संगठित कर राष्ट्रहित में सर्वांगीण अंत्योदय के लिए सदुपयोग करने के इस महायज्ञ में अपना योगदान करना ही होगा।

पृश्न- सर्वांगीण अंत्योदय क्या है?

उत्तर- मनुष्य जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता स्वास्थ्य, धन व अध्यात्म के सही व सहज संसाधन समाज के सबसे वंचित व्यक्ति को पूर्ण सहजता से उपलब्ध हो ।यही सर्वांगीण अन्त्योदय है

1.आध्यात्मिक अंत्योदय- अंतिम व्यक्ति तक निश्चित परिणामदायी अध्यात्म (Result Oriented spirituality) को पहुँचाना।अर्थात अहम विसर्जन साधना, स्व- बोध साधना,परम प्रेम साधना, श्री धनवृद्धि साधना की पहुंच सुनिश्चित करना
2.आर्थिक अंत्योदय- अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं के आर्थिक लाभ व श्री धनवृद्धि साधना की पहुंच सुनिश्चित करना
3.स्वास्थ्य अंत्योदय- अन्तिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य संबंधी सरकारी योजनाओं के लाभ व सर्वांग-योग-साधना की पहुंच सुनिश्चित करना
4.संवैधानिक अंत्योदय ( संवैधानिक जानकारी की समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंच सुनिश्चित करना।जिससे सबको यह पता लग सके कि क्या हमारे अधिकार है, हमें किन नियम कानून के आधार पर जीवन जीना है। जिससे सामाजिक समता व आमजन के आत्मविश्वास मे वृद्धि हो सके)
5.स्थानीय कार्यकारिणीयों द्वारा समसामयिक व स्थानीय मुद्दों का सात्विक निस्तारण।

योगीज⛳️सेना में आपका हार्दिक स्वागत है व आपसे आग्रह है, कि अपना कर्तव्य समझ! योगियों, महापुरुषों,सैनानियों,शहीदों के सपनों का भारत निर्मित करने के सेवाकार्य हेतु योगीज⛳️सेना के पदाधिकारी/साइबर-सैनिक(कार्यकर्ता) बनें व कम से कम अपने 10 मिनट स्मार्टफोन पर सरकारी योजनाओं, संविधान,सही अध्यात्म, स्वास्थ्य की पोस्ट जरूर शेयर करें।
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